उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर नई व्यवस्था की तैयारी शुरू हो गई है। ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर नई व्यवस्था की तैयारी शुरू हो गई है। ग्राम प्रधानों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों को भी कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक बनाए जाने पर विचार चल रहा है। पंचायती राज विभाग ने इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। मंजूरी मिलने के बाद पंचायत चुनाव होने तक मौजूदा अध्यक्ष और प्रमुख ही प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
ग्राम प्रधानों के बाद अब अगला कदम प्रदेश में 57 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार ने ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया था। अब इसी व्यवस्था को क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर लागू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे गांव से लेकर जिले तक विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहेगी। पंचायतों में चल रही योजनाएं प्रभावित नहीं होंगी। स्थानीय स्तर पर काम करने वाले जनप्रतिनिधि ही प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे।
जुलाई में खत्म होगा कार्यकाल
प्रदेश के 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई को पूरा हो रहा है। वहीं 826 ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को समाप्त होगा। इसके बाद सामान्य व्यवस्था में जिला पंचायत के लिए जिलाधिकारी और क्षेत्र पंचायत के लिए उप जिलाधिकारी को प्रशासक बनाया जाता है। लेकिन इस बार सरकार मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्षों और ब्लॉक प्रमुखों को ही प्रशासक बनाने के विकल्प पर विचार कर रही है।
विकास कार्यों में निरंतरता पर जोर
पंचायती राज विभाग का मानना है कि अचानक प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी देने से कई बार स्थानीय विकास कार्यों की गति धीमी हो जाती है। वहीं वर्तमान अध्यक्ष और प्रमुख क्षेत्र की समस्याओं और योजनाओं से पहले से जुड़े होते हैं। यदि उन्हें प्रशासक बनाया जाता है तो पंचायतों के काम लगातार चलते रहेंगे। विकास योजनाओं की निगरानी भी आसान होगी।
चुनाव तक रहेगी अंतरिम व्यवस्था
प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। माना जा रहा है कि चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं। ऐसे में सरकार पंचायतों में खाली व्यवस्था से बचने के लिए अंतरिम व्यवस्था तैयार कर रही है। इस प्रस्ताव पर शासन स्तर पर नियमों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर विचार किया जा रहा है। अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद होगा।
पहली बार बन सकती है नई व्यवस्था
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत तीनों स्तरों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी देने की व्यवस्था बन जाएगी। इससे पंचायतों में राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश होगी। हालांकि अंतिम निर्णय शासन के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।

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