उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। योगी सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित राज्य पिछड़ा व
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। योगी सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्ग की भागीदारी का अध्ययन करेगा। इसकी रिपोर्ट के बाद ही पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह करेंगे। आयोग में कुल पांच सदस्य शामिल हैं। इसका मुख्यालय लखनऊ में बनाया गया है। आयोग को छह महीने में अपनी रिपोर्ट देनी होगी।
सरकार का कहना है कि पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू करने से पहले “ट्रिपल टेस्ट” प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। अदालत भी इस प्रक्रिया को अनिवार्य बता चुकी है। इसी कारण सरकार ने अलग आयोग बनाकर सर्वे कराने का फैसला लिया है।
आयोग पंचायतों में ओबीसी समुदाय की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर आरक्षण सूची तैयार होगी। इसके बाद ही ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी।
राजनीतिक दल भी पंचायत चुनाव की तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं। गांवों में संभावित उम्मीदवार आरक्षण की स्थिति को लेकर चर्चा कर रहे हैं। पंचायत चुनाव में महिलाओं, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू होता है। ओबीसी आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत तक निर्धारित है।
सरकार का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत और विवाद मुक्त बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अब आयोग की रिपोर्ट के बाद पंचायत चुनाव की दिशा साफ होगी।

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