बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया ने उस समय गति पकड़ ली जब प्रपत्र-एक का अंतिम प्रकाश
बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया ने उस समय गति पकड़ ली जब प्रपत्र-एक का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया। दावा-आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम सूची जारी कर दी गई है। अब इसी आधार पर पंचायत प्रतिनिधियों के विभिन्न पदों के लिए आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा।
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की जनसंख्या तय की गई है। इसी के अनुसार मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और जिला परिषद सदस्य के पदों का आरक्षण निर्धारित होगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलों को समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी कर अंतिम सूची पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है।
आरक्षण में बदलाव
पंचायत चुनाव में आरक्षण निर्धारण सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। इस बार नई आरक्षण व्यवस्था के तहत कई पंचायतों और वार्डों में बदलाव देखने को मिल सकता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए सीटों का निर्धारण क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाएगा। आरक्षण चक्रीय प्रणाली से लागू होगा। पिछले चुनावों में जिन सीटों पर आरक्षण था, उनमें बदलाव की संभावना है। इससे पंचायतों में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
अक्टूबर-नवंबर में मतदान
बिहार पंचायत चुनाव 2026 अक्टूबर से नवंबर के बीच होने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने की तैयारी में जुटा है। माना जा रहा है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है। सुरक्षा व्यवस्था, ईवीएम की उपलब्धता और प्रशासनिक सुविधा को देखते हुए मतदान कई चरणों में कराया जा सकता है।
पहली बार मल्टी पोस्ट ईवीएम
इस चुनाव की बड़ी खासियत मल्टी पोस्ट ईवीएम का उपयोग होगा। पहली बार पंचायत चुनाव में ऐसी मशीनों का प्रयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से मतदाता एक ही मतदान केंद्र पर पंचायत के छह पदों के लिए वोट डाल सकेंगे। ग्राम पंचायत सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए अलग-अलग मतदान करने की सुविधा एक ही मशीन से मिलेगी। इससे चुनाव प्रक्रिया तेज और आसान होगी।
सुरक्षा पर विशेष नजर
मल्टी पोस्ट ईवीएम को सुरक्षित रखने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। वेयर हाउस में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। सुरक्षा बलों की तैनाती भी रहेगी। मतदान के बाद ईवीएम और उससे जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाएगा ताकि चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।
डिजिटल होगा चुनाव
पंचायत चुनाव में तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाएगा। मतदान केंद्रों और मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी, वेबकास्टिंग और डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष नजर रखी जाएगी। इससे चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
बदलेगा पंचायतों का समीकरण
नई आरक्षण व्यवस्था और परिसीमन के कारण बिहार की चार हजार से अधिक पंचायतों और हजारों वार्डों में बदलाव की संभावना है। पंचायत चुनाव ग्रामीण क्षेत्रों की सरकार चुनने का सबसे बड़ा माध्यम है। नई तकनीक, नई आरक्षण व्यवस्था और मजबूत निगरानी के साथ बिहार पंचायत चुनाव 2026 ग्रामीण लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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