पुणे इंटरनेशनल सेंटर (PIC) द्वारा 13 अप्रैल 2026 को “शासन के संक्रमणकालीन चरण” विषय पर एक महत्वपूर्ण गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश
पुणे इंटरनेशनल सेंटर (PIC) द्वारा 13 अप्रैल 2026 को “शासन के संक्रमणकालीन चरण” विषय पर एक महत्वपूर्ण गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देशभर के नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों के नगर पंचायतों में बदलते स्वरूप और उसके सामाजिक, प्रशासनिक तथा आर्थिक प्रभाव रहे।
इस गोलमेज बैठक का आयोजन PIC के “सहकारी संघवाद और बहुस्तरीय शासन” (CFMG) वर्टिकल के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम में डॉ. विजय केलकर, डॉ. अजीत रानाडे, प्रो. अभय पेठे, श्री सुनील कुमार, प्रो. अजीत कर्णिक, सुश्री जुथिका पाटणकर, श्री जयराज पाठक, डॉ. चंद्रशेखर प्राण, श्री मिलिंद म्हस्के, श्री जितेंद्र पंडित, श्री अविरल नारायण दुबे, श्रीमती मेघमाला सी तथा सुश्री प्रितिका मल्होत्रा सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में “ग्रामीण से शहरी शासन में संक्रमण और भारत में नागरिकों के लिए बुनियादी सेवा वितरण पर उसका प्रभाव” विषयक राष्ट्रीय अध्ययन प्रस्तुत किया गया। इस अध्ययन का मार्गदर्शन सेवानिवृत्त IAS अधिकारी और विजिटिंग सीनियर फेलो श्री सुनील कुमार ने किया। शोध का समन्वय अनय कुलकर्णी द्वारा किया गया।
अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया कि जब ग्रामीण स्थानीय निकाय नगर पंचायत या शहरी निकायों में परिवर्तित होते हैं, तब प्रशासनिक व्यवस्था, नागरिक सेवाएं, वित्तीय संसाधन, जवाबदेही और जनभागीदारी पर क्या प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। गांवों का स्वरूप बदल रहा है। कई ग्राम पंचायतें अब आर्थिक और सामाजिक रूप से शहरी विशेषताएं प्राप्त कर चुकी हैं, लेकिन उनका शासन अब भी ग्रामीण ढांचे के अंतर्गत संचालित हो रहा है। इससे योजनाओं और सेवाओं के क्रियान्वयन में असमानताएं उत्पन्न हो रही हैं।
PIC द्वारा प्रस्तुत केस स्टडी में महाराष्ट्र के पुणे जिले के मुलशी और मावल तालुका के क्षेत्रों का अध्ययन किया गया। हिंजेवाड़ी, मान, मरुंजे, नेरे, जांबे, सांगवड़े और गहुंजे जैसे क्षेत्रों में तेजी से शहरी विस्तार देखा गया है। इन क्षेत्रों में आईटी पार्क, उद्योग और आवासीय परियोजनाओं के कारण जनसंख्या और भूमि उपयोग में व्यापक बदलाव आया है।
अध्ययन में पाया गया कि इन ग्राम पंचायतों में शहरी सुविधाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन प्रशासनिक ढांचा ग्रामीण होने के कारण नागरिकों को जल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन, सड़क और सीवरेज जैसी मूलभूत सेवाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
Transforming Rural India (TRI) संस्था की ओर से श्री जितेंद्र पंडित ने विभिन्न राज्यों के संक्रमणशील क्षेत्रों की जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने उत्तर प्रदेश के टप्पल क्षेत्र का उल्लेख किया, जहां जेवर एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के कारण तेज शहरीकरण हो रहा है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के राखी क्षेत्र का भी उल्लेख किया, जो नया रायपुर परियोजना के विस्तार से प्रभावित हुआ है। वहीं मध्य प्रदेश के जुलवानिया क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-52 के कारण व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी हैं और क्षेत्र तेजी से शहरी स्वरूप ले रहा है।
Praja Foundation के प्रतिनिधि अविरल दुबे ने उत्तर प्रदेश के मोहनलालगंज का अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में इसे नगर पंचायत घोषित किया गया। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आने के बाद यहां आईटी और औद्योगिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
Teesari Sarkar Abhiyan (TSA) की ओर से डॉ. सी. एस. प्राण ने गाजीपुर के गहमर और प्रतापगढ़ के पृथ्वीगंज का अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गहमर कार्यात्मक रूप से शहरी क्षेत्र बन चुका है, लेकिन स्थानीय स्तर पर नगर पंचायत बनने का विरोध भी देखने को मिला है।
उन्होंने बताया कि पृथ्वीगंज को वर्ष 2021-22 में नगर पंचायत बनाया गया, लेकिन यहां की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। इस कारण प्रशासनिक और विकास संबंधी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। TSA इस क्षेत्र का विशेष अध्ययन कर रहा है।
बैठक में विशेषज्ञों ने कहा कि ग्रामीण से शहरी संक्रमण केवल प्रशासनिक परिवर्तन नहीं है। यह सामाजिक ढांचे, भूमि उपयोग, आर्थिक गतिविधियों और नागरिक-राज्य संबंधों में भी बड़ा बदलाव लाता है। इसलिए इस प्रक्रिया को संवेदनशील और योजनाबद्ध तरीके से लागू करना आवश्यक है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि नगर पंचायत बनने के बाद नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं। लोग बेहतर सड़क, साफ-सफाई, पेयजल, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं की मांग करते हैं। यदि शासन व्यवस्था समय पर इन जरूरतों को पूरा नहीं करती, तो लोगों में असंतोष बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि संक्रमणशील क्षेत्रों के लिए अलग नीति ढांचा तैयार किया जाए। ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के बीच समन्वय बढ़ाया जाए। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और वित्तीय संसाधनों का विकेंद्रीकरण किया जाए।
PIC ने बताया कि यह अध्ययन देशभर में नीति निर्माण के लिए उपयोगी साबित होगा। अध्ययन के निष्कर्ष केंद्र और राज्य सरकारों को शहरीकरण से जुड़ी चुनौतियों को समझने और बेहतर नीतियां तैयार करने में सहायता देंगे।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने सहमति जताई कि भारत के बदलते ग्रामीण परिदृश्य को देखते हुए संक्रमणशील क्षेत्रों के लिए उत्तरदायी, समावेशी और चरणबद्ध शासन मॉडल विकसित करना समय की आवश्यकता है।

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