पंचायती राज व्यवस्था की वास्तविक ताकत ग्राम सभा है – डॉ. चंद्रशेखर प्राण

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पंचायती राज व्यवस्था की वास्तविक ताकत ग्राम सभा है – डॉ. चंद्रशेखर प्राण

“बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव” के दूसरे दिन 2 मई 2026 को श्री गोपालम् वेलनेस रिजॉर्ट में “राष्ट्र निर्माण में पंचायत की भूमिका” विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित ह

“बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव” के दूसरे दिन 2 मई 2026 को श्री गोपालम् वेलनेस रिजॉर्ट में “राष्ट्र निर्माण में पंचायत की भूमिका” विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध गाँधीवादी एवं समाजसेवी श्री राम धीरज ने किया। संचालन प्रोफेसर गीता रानी शर्मा ने किया।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रयागराज से आये तीसरी सरकार अभियान के संस्थापक डॉ. चंद्रशेखर प्राण जी थे। उन्होंने ग्रामीणों और युवाओं के सवालों के सरल और संवैधानिक जवाब दिए। उन्होंने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था की असली ताकत ग्राम सभा है। ग्राम सभा का हर सदस्य अपने गाँव का निर्णयकर्ता है। गाँव के लोग मिलकर अपनी समस्याएँ तय कर सकते हैं और उनके समाधान के लिए पंचायत को जिम्मेदार बना सकते हैं।

कार्यक्रम के अन्त में रिजॉर्ट संचालक श्री सुनील कुमार सिंह जी ने सभी अतिथियों और ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। प्रस्तुत हैं प्रश्न–उत्तर के प्रमुख अंश—

प्रश्न 1

हमारे पंचायत में मुखिया पद लगातार एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो रहा है। जबकि अन्य वर्गों की आबादी भी अधिक है। इसमें बदलाव कैसे होगा?

उत्तर :

प्रशासन आरक्षण तय करने से पहले नोटिफिकेशन जारी करता है और लोगों से सुझाव व आपत्तियाँ माँगता है। यदि समय रहते आपत्ति दर्ज की जाये तो उस पर विचार होता है। यह प्रक्रिया चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले शुरू हो जाती है। इसलिए लोगों को समय पर जागरूक होकर अपनी बात रखनी चाहिए।

प्रश्न 2

आरक्षण प्रक्रिया में कुछ लोगों की मिलीभगत रहती है। विरोध करने वाला व्यक्ति समाज में दुश्मन बन जाता है। ऐसे में क्या करें?

उत्तर :

सही समय पर सही प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। निर्णय होने के बाद विरोध करने का लाभ नहीं होता। लोगों को पहले से जागरूक करना होगा और समय रहते आपत्ति दर्ज करनी होगी। सामूहिक रूप से आवाज उठाने पर असर अधिक होता है।

प्रश्न 3

आज चुनाव में बहुत पैसा खर्च होता है। गरीब लोग चुनाव कैसे लड़ें?

उत्तर :

यह सही है कि आज कई चुनावों में पैसे का प्रभाव बढ़ गया है। लेकिन चुनाव केवल पैसे से नहीं जीते जाते, मुद्दों से भी जीते जाते हैं। यदि जनता के असली मुद्दे उठाए जाएँ और लोगों का विश्वास मिले, तो कम संसाधनों में भी चुनाव जीता जा सकता है।

इस दौरान प्रोफेसर गीता रानी शर्मा जी ने सेवापुरी ब्लॉक का उदाहरण दिया, जहाँ एक छात्रा ने गाँव में शराब बाँटने का विरोध किया और जिस प्रत्याशी का उसने समर्थन किया, वह चुनाव जीत गया।

प्रश्न 4

आप इतनी दूर से आकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं, फिर भी कम लोग आए हैं। समाज में बदलाव कैसे आएगा?

उत्तर :

समाज में परिवर्तन हमेशा कुछ जागरूक लोगों से शुरू होता है। लगातार बैठकें और संवाद जरूरी हैं। आज जो लोग आए हैं, वही आगे और लोगों को जोड़ेंगे। समाज बदलने की जिम्मेदारी हम सबकी है।

प्रश्न 5

चुनाव लड़ने वाले और जीतने वाले प्रतिनिधियों को भी पंचायती राज व्यवस्था की सही जानकारी नहीं होती। ऐसे में आम लोग क्या करें?

उत्तर :

निर्णय लेने का अधिकार केवल मुखिया या वार्ड सदस्य का नहीं है। सबसे बड़ा अधिकार ग्राम सभा का है। जैसे देश में संसद और राज्य में विधानसभा होती है, वैसे ही गाँव में ग्राम सभा सर्वोच्च संस्था है।

ग्राम सभा में लिए गए निर्णयों को लागू करना मुखिया और वार्ड सदस्य की जिम्मेदारी है। गाँव का हर नागरिक ग्राम सभा का सदस्य है और उसे अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझना होगा। जागरूक ग्राम सभा ही मजबूत पंचायत की पहचान है।

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