उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष आयोग के गठन की घोषणा की है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष आयोग के गठन की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि यह आयोग पंचायत स्तर पर ओबीसी वर्ग की सामाजिक एवं राजनीतिक स्थिति का अध्ययन कर आरक्षण संबंधी आवश्यक सुझाव देगा।
आयोग पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को संवैधानिक प्रावधानों एवं न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू करने के लिए कार्य करेगा। आयोग प्रदेश के विभिन्न जिलों से आंकड़े एकत्र कर यह तय करेगा कि किस स्तर पर ओबीसी आरक्षण की आवश्यकता और उपयुक्तता है।
पंचायत चुनावों में सामाजिक न्याय और सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पंचायत चुनावों में आरक्षण संबंधी अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग के गठन से पंचायतों में पिछड़े वर्गों की भागीदारी को संस्थागत आधार मिलेगा तथा स्थानीय स्वशासन व्यवस्था अधिक प्रतिनिधिक बन सकेगी।
पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिये आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। सरकार ने कहा कि पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 243-घ तथा संबंधित राज्य अधिनियमों के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जाएगी।
सरकार के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों को पंचायतों में उनकी जनसंख्या के आधार पर आरक्षण प्रदान किया जाता है, किन्तु पिछड़ा वर्ग आरक्षण की अधिकतम सीमा 27 प्रतिशत निर्धारित रहेगी। इस संबंध में गठित आयोग पंचायत स्तर पर आंकड़ों का परीक्षण कर अपनी संस्तुतियाँ प्रस्तुत करेगा।

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